उत्तराखण्ड सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) उत्तराखण्ड, 2024 में आवश्यक संशोधनों के लिए लाया गया समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लागू कर दिया गया है। यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया है और तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गया है।
प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार
अध्यादेश के माध्यम से यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य संहिता के प्रभावी, पारदर्शी और सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है, ताकि नागरिकों को अधिक स्पष्ट, व्यावहारिक और सशक्त व्यवस्था मिल सके।
नई आपराधिक संहिताओं का प्रावधान
संशोधन के तहत अब आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 को लागू किया गया है।
इसके साथ ही धारा 12 के अंतर्गत अब सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।
पंजीकरण व्यवस्था और अपील का अधिकार
उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं पंजीयक जनरल को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार प्रदान किया गया है तथा दंड की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
विवाह और लिव-इन संबंधों में सख्ती
संशोधन के तहत विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है।
विवाह एवं लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी या विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। साथ ही लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का भी प्रावधान किया गया है।
भाषाई और अधिकार संबंधी बदलाव
अनुसूची-2 में विधवा शब्द के स्थान पर जीवनसाथी शब्द का प्रयोग किया गया है।
विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।
सरकार का कहना है कि ये संशोधन यूसीसी को अधिक व्यवहारिक, प्रभावी और नागरिक-हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
