उत्तराखंड में अगले चार दिनों तक मानसून का सबसे तीव्र दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने 8 से 11 जुलाई तक प्रदेश में सक्रिय से प्रबल मानसूनी गतिविधियों का पूर्वानुमान जारी करते हुए लोगों, चारधाम यात्रियों और जिला प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार 9 और 10 जुलाई को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, जलभराव और सड़कें बाधित होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) और उससे जुड़े चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से उत्तराखंड में लगातार वर्षा की गतिविधियां तेज रहेंगी। इसके चलते देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जिलों में 9 और 10 जुलाई को कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। अन्य पर्वतीय जिलों में भी कई स्थानों पर तेज से अत्यंत तीव्र वर्षा हो सकती है। 11 जुलाई को भी पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश का असर बना रहेगा।
विभाग ने प्रदेश के लगभग सभी जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज गर्जना की चेतावनी भी जारी की है। लगातार बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और मलबा आने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा नदियों, गदेरों और बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने से फ्लैश फ्लड का खतरा भी बना हुआ है। कई स्थानों पर सड़कें, पुल और राजमार्ग प्रभावित हो सकते हैं।
मौसम विभाग ने चेताया है कि खराब मौसम का असर बिजली, पेयजल, परिवहन और आवश्यक आपूर्ति सेवाओं पर भी पड़ सकता है। हवाई, हेलीकॉप्टर और रेल सेवाएं प्रभावित होने की संभावना के साथ ही धान, मक्का और बाजरा जैसी खरीफ फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों को मौसम की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने को कहा गया है। वहीं आम लोगों से अपील की गई है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहें तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। सतर्कता और समय रहते एहतियात बरतना ही संभावित आपदाओं से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय होगा।
